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बेख़ाब रेत

AAI Shayar 12 views 1 min read

तुम्हारी हँसी ने निःशब्द सितारों को जगा दिया हर धड़कन अब तेरे नाम का सूत्र बुनती है, जैसे धागा बुने बिना बुनाई अलफ़ाज़ नहीं, बस आँखों की चुप्पी जो गुनगुनाती है पुराने किसी सपने की धुन इस मोहब्बत में मैं खुद को खोकर भी खुद को पाता हूँ, जैसे दर्पण में अपना चेहरा देख लेता हूँ

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