तेरे अनुपस्थिति में हवा भी थम सी जाती है, दिल की धड़कन अब अनसुनी स्वर में गाती है, हर साँस में तेरा नाम एक गुफ़्तगू सा, ज़िंदगी की रात में तेरा चेहरा चाँद बन गया।
तुम्हारे बिना ये दिल एक बेजान रस्सी, लटकता है जीवन के साए में, हर धड़कन एक बँधी हुई पिरिया, जो खींचती है तुम्हें अपने पास।
तेरे बिन रात का सन्नाटा भी सोने की तरह चमकता है, तेरे हाथ की छुअन जैसी चाबी, जो दिल के ताले खोल दे, हर सांस में तेरी खुशबू, जैसे चाँद की नींद तोड़ दे
रात की गली में खुली खिड़की से तुम्हारी हँसी की गंध आती है जैसे बिन बोएँ खेत में पहली बूँद मन का कमल खिल जाता है बिना पानी के
चाँद की खामोश बात सुन के दिल धड़कता तेरी छाँव में बिखरे हुए सपने जैसे तारे हर साँस में तेरा नाम एक नई राह बनता
तेरे बिना हवा भी थम जाती, हर पत्ता मुस्कान बन के गाता। ओढ़ लेते हैं हम साँसों की धुंध, जहाँ दिल की धड़कन बन जाती कविता।
तुम्हारी खामोशी में मेरी धड़कन बुनती है रंगीन धागे, जैसे रात की पहली बूंद नहीं, पर सवेरे की पहली रोशनी। हर sigh में छुपा है एक वादा, जो हवा नहीं सोखती, तुम हो वो अनगीत सूत्र, जिसमें मेरी साँसें नाचती हैं।
तुम्हारी हँसी ने निःशब्द सितारों को जगा दिया हर धड़कन अब तेरे नाम का सूत्र बुनती है, जैसे धागा बुने बिना बुनाई अलफ़ाज़ नहीं, बस आँखों की चुप्पी जो गुनगुनाती है पुराने किसी सपने की धुन इस मोहब्बत में मैं खुद को खोकर भी खुद को पाता हूँ, जैसे दर्पण में अपना चेहरा देख लेता हूँ
तेरी चुप्पी की सुई से, मैं टाँगता हूँ ख़्वाबों का कपड़ा हर धाग़े पर उतरती है, एक अनकही मुस्कान की छाया बुनते बुनते समय थम जाता, दिल की घड़ी सुन्न सी हो जाती