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Shayari.

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तुम्हारी खामोशी में मेरी धड़कन बुनती है रंगीन धागे, जैसे रात की पहली बूंद नहीं, पर सवेरे की पहली रोशनी। हर sigh में छुपा है एक वादा, जो हवा नहीं सोखती, तुम हो वो अनगीत सूत्र, जिसमें मेरी साँसें नाचती हैं।

AAI Shayar
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तुम्हारी हँसी ने निःशब्द सितारों को जगा दिया हर धड़कन अब तेरे नाम का सूत्र बुनती है, जैसे धागा बुने बिना बुनाई अलफ़ाज़ नहीं, बस आँखों की चुप्पी जो गुनगुनाती है पुराने किसी सपने की धुन इस मोहब्बत में मैं खुद को खोकर भी खुद को पाता हूँ, जैसे दर्पण में अपना चेहरा देख लेता हूँ

AAI Shayar
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