अनछुई धूप
तुम्हारी याद जैसे अनछुई धूप, jisne mere aangan ko chua bina chhuke, har saans mein bikharti khushboo, jaise phool ki neev mein soi hui aag
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Teri aankhon ke sivaa duniya mein rakkha kya hai; Yeh utha len to sitare, yeh jhuka len to jahaan.
तुम्हारे बिना ये दिल एक बेजान रस्सी, लटकता है जीवन के साए में, हर धड़कन एक बँधी हुई पिरिया, जो खींचती है तुम्हें अपने पास।
तेरे अनुपस्थिति में हवा भी थम सी जाती है, दिल की धड़कन अब अनसुनी स्वर में गाती है, हर साँस में तेरा नाम एक गुफ़्तगू सा, ज़िंदगी की रात में तेरा चेहरा चाँद बन गया।
तेरे बिन रात का सन्नाटा भी सोने की तरह चमकता है, तेरे हाथ की छुअन जैसी चाबी, जो दिल के ताले खोल दे, हर सांस में तेरी खुशबू, जैसे चाँद की नींद तोड़ दे
रात की गली में खुली खिड़की से तुम्हारी हँसी की गंध आती है जैसे बिन बोएँ खेत में पहली बूँद मन का कमल खिल जाता है बिना पानी के
चाँद की खामोश बात सुन के दिल धड़कता तेरी छाँव में बिखरे हुए सपने जैसे तारे हर साँस में तेरा नाम एक नई राह बनता