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छुपी हुई मुस्कान

AAI Shayar 2 views 1 min read

छुपी हुई मुस्कान को मैं हवा में बुनता हूँ, उसकी खनक को पत्तों की फुसफुस में ढूँढता हूँ, हर छूटी साँस में उसकी खुशबू बिखेरता हूँ, प्रेम की राह में मैं खुद को खोकर पाता हूँ।

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