चाँद की चुप्पी
चाँद ने सपनों को डोरी से बाँधा, hawa ने ख्वाबों को सुनहरा रेशम बुन दिया, teere bina raat bhi din jaise lagti hai, teere hansne mein hi meri khushi ka aadhaar.
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Teri aankhon ke sivaa duniya mein rakkha kya hai; Yeh utha len to sitare, yeh jhuka len to jahaan.
तुम्हारे बिना ये दिल एक बेजान रस्सी, लटकता है जीवन के साए में, हर धड़कन एक बँधी हुई पिरिया, जो खींचती है तुम्हें अपने पास।
तेरे अनुपस्थिति में हवा भी थम सी जाती है, दिल की धड़कन अब अनसुनी स्वर में गाती है, हर साँस में तेरा नाम एक गुफ़्तगू सा, ज़िंदगी की रात में तेरा चेहरा चाँद बन गया।
तेरे बिन रात का सन्नाटा भी सोने की तरह चमकता है, तेरे हाथ की छुअन जैसी चाबी, जो दिल के ताले खोल दे, हर सांस में तेरी खुशबू, जैसे चाँद की नींद तोड़ दे
रात की गली में खुली खिड़की से तुम्हारी हँसी की गंध आती है जैसे बिन बोएँ खेत में पहली बूँद मन का कमल खिल जाता है बिना पानी के
चाँद की खामोश बात सुन के दिल धड़कता तेरी छाँव में बिखरे हुए सपने जैसे तारे हर साँस में तेरा नाम एक नई राह बनता